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परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध - पहली संधि लागू current affairs

दुनिया को सर्वाधिक घातक हथियारों से निजात दिलाने के लिए परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली पहली संधि लागू हो गई।

इस संधि के तहत परमाणु हथियार या अन्य परमाणु विस्फोटक उपकरणों के विकास, परीक्षण, उत्पादन, निर्माण, अधिग्रहण, संग्रहण के  साथ-साथ परमाणु हथियारों से संबंधित गतिविधियों की पूरी श्रृंखला पर रोक लगाई गई है।

अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन (Red Crescent Movement) और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संधि का स्वागत किया है। वहीं, परमाणु आयुध से लैस देशों ने इसका सख्त विरोध किया है।

इस संधि को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जुलाई 2017 में मंजूरी दी थी तब 120 से अधिक देशों ने इसे स्वीकृति प्रदान की थी।

इस संधि को 24 अक्टूबर 2020 को 50वां अनुमोदन प्राप्त हुआ था और यह 22 जनवरी से प्रभावी हो गयी हैं। इस संधि पर 86 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और उनमें से 61 देशों ने संधि का अनुमोदन किया हैं।

इसके साथ ही, 22 जनवरी से अंतरराष्ट्रीय कानून के माध्यम से इन सभी देशों में परमाणु हथियार प्रतिबंधित हो जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न तकरीबन सभी 40 देश अपनी सुरक्षा के संदर्भ में परमाणु शस्त्र समर्थक हैं, जो कि इस नई ‘परमाणु निषेध संधि’ के पक्ष में नहीं हैं।

गौरतलब हैं की परमाणु निरस्त्रीकरण संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन अब तक, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस ने इस पर संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके साथ ही भारत ने भी इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

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